Advertisements

वह न थे हिन्दू, न थे मुसलमान

“लाठी पत्थर हाथ में लिए कर रहे थे इंसानियत को शर्मसार,

मुंह पर कपड़ा लपेटे चिल्ला रहे थे अल्लाह या जय श्री राम,

वह थे हैवान, न थे हिन्दू, न थे मुसलमान

यह सिर्फ समझ का हेर-फेर है कि समझदार भी समझदारी छोड़ कर नासमझी की बातें करने लगे हैं ।

दिल्ली हिंसा की गंदी तस्वीर ने लोगों के दिलों को दहला दिया है और दिल्लीवालों का भरोसा कि वह राजधानी में सुरक्षित हैं, उन्हीं दंगों में उठी आग की लपटों के धूए की तरह धूमिल हो गया है ।

दिल्ली दंगों के दौरान रिकोर्ड़ की गई वीड़ियोज़ (videos) साफ दर्शाती हैं कि वह लोग न हिन्दू थे और न ही मुसलमान क्योंकि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना । वह आतंकी किसी मजहब के नहीं हैं । वह इंसान ही कहलाने लायक नहीं हैं ।

आज भी लोग आंकड़ों में उलझे हैं कि कितने हिन्दू मरें, कितने मुसलमान । कत्ल तो इन्सानियत का हुआ है । शर्मसार सृष्टि का निर्माता हुआ है अपने ही निर्मित जीवों को आपस में इस तरह उलझता देख ।

इसी दरिंदगी के बीच बहुत एसे वाक्यात भी सामने आए हैं जहां हिन्दू परिवार ने बताया कि कैसे उन्कें पड़ोसी ने, जो मुसलमान थे, उनके बच्चे की जान बचाई । कैसे हिन्दु पड़ोसियों ने मुसलमान परिवार को आश्वासन दिया की वह फिक्र न करें, वह उन्हें कुछ नही होने देंगे ।

सोचने और समझने की बात है जो बचपन से साथ रहे हैं, जिन्होंने साथ मिलकर एक दूसरे के त्यौहार मनाए हैं, जो एक दूसरे की खुशी और गम में शरीख हुए हैं, वह कैसे अचानक एक दूसरे की जान के प्यासे बन सकते हैं । यह महज़ एक साज़िश है, कूटनीति है ।

अपने अन्दर की इन्सानियत को किसी गंदी राजनीति का मोहरा न बनने दें और न ही एक दूसरे के लिए मन में द्वेश रखें क्योंकि परदे के पीछे का सच कुछ और ही है।

कोई मजहब गलत नहीं है। इंसान के कर्म उसे सही या गलत बनाते हैं। दंगा करके किसी की जान लेने वाले का कोई ईमान, कोई मज़हब नहीं होता । जिन्होंने इस शर्मनाक घटना में अपनों को खोया है उनका दुख और दर्द कोई नही समझ सकता । ईश्वर/अल्लाह उन शहीद हुए लोगों की आत्मा को शांति दें और उनकें परिवार के सदस्यों को इस मुश्किल घड़ी में हौसला दें ।

Tripohlic एक travelling पेज है मगर दिलों में बढ़ती नफरत को देख मुझसे लिखे बिना रहा न गया । सिर्फ इतना कहना है कि प्यार बांटने से बढ़ता है और नफरत भी । यह आप पर निर्भर करता है कि आप क्या बढ़ाना चाहते हैं । आप में से जो मुसलमान हैं उनकें हिन्दू दोस्त भी होगें और जो हिन्दू हैं उनके मुसलमान दोस्त भी होगें । उनका चेहरा हमेशा सामने रखें जब भी कोई बुरा ख्याल मन में आए ।

इस तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करने में अपना पूर्ण सहयोग दें । धन्यवाद ।

Advertisements

Leave a Reply

Up ↑

%d bloggers like this: